Written by – Anupriya ( Sem 1)

आयुर्वेद में इसे कई बीमारियों के लिए गुणकारी माना जाता है, वैसी बीमारियों के लिए भी जिनके बारे में कई लोगों ने ये तक कह दिया कि यह कभी ठीक नहीं हो सकती, वैसी बीमारियां जिनके कारण लोग निराश हो जाते हैं। कुदरत का यह उपहार लोगों को निराशा को आशा में बदल देता है। जीवों के लिए यह अत्यधिक लाभदायक औषधि है, एक तरह से कह जाए तो यह हमारे लिए ईश्वर का तोहफा है।
इसके कई फायदे हैं जैसे – खून को शुद्ध करना, त्वचा और बालों के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, लीवर और पाचन तंत्र नियमित रखता है, मधुमेह, बुखार, दर्द, कुछ रोग, नेत्र विकार तथा अनेक रोगों में जीवों को स्वस्थ करने में सहायक है।

कुदरत के इस उपहार को नीम के नाम से जाना जाता है। वैसे नीम के अलावा और दूसरे नामों से भी जाना जाता है जैसे – संस्कृत में नीम, मार्जोस, भारतीय कडु, तिक्त, तथा अन्य प्रांतों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Azadirachta indica है। नीम एक औषधीय पेड़ है जिसकी पत्ते, छाल, टहनियां एवं फल सभी का उपयोग बहुत से रोगों से ठीक होने के लिए किया जाता है। नीम का उपयोग दांत और मसूड़ों के लिए भी किया जाता है। इससे दांत एवं मसूड़े स्वस्थ रहते हैं। नीम एक प्राकृतिक कीटनाशक एवं जीवाणुनाशक भी है।
इसके उपयोग करते समय कुछ सावधानियां भी रखनी चाहिए, खासकर गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को नीम का सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए क्योंकि यह उनके लिए नुकसानदायक हो सकती है। साथ ही जो लोग लंबे समय से किसी दवा का सेवन कर रहे हैं उन्हें भी चिकित्सक की सलाह के बिना नीम का उपयोग नहीं करना चाहिए।
इस तरह कुदरत का यह बेहतरीन तोहफा सभी जीवों को अपनी गुणवत्ता द्वारा बेहद लाभ अर्थात नया जीवन देता है। निराश लोगों को आशा देता है और जीवन को खुशियों से भर देता है।

